भाजपा किसान मोर्चा का हल्ला बोल:बोले, सवाईमाधोपुर में अब तक लंपी से 1200 गोवंश की मौत, मेडिकल सुविधा देने की मांग
September 14, 2022
0
लेंपी वायरस से कई गाय शिकार हो रही है जिससे कि गाय माता की मौत हो रही है इस बीमारी में सबसे पहले 1929 में देखी गई थी इस रोग को भारत में सबसे पहले 12 अगस्त 2019 उड़ीसा में देखी गई थी इस रोग को घटिया रोग भी कहा जाता है इस बारे में गाय भैंस आदि प्रभावित होती है गाय भैंसों के शरीर पर गाते बन जाती है यह रोग मच्छर आदि कीटाणुओं से खेलते हैं जैसे कि गाय के ऊपर गाते हो जाती है उसके बाद उस पर मच्छर बैठते हैं और उसका खून chuste Hain हैं फिर यही मच्छर दूसरे गाय पर जाकर बैठते हैं इससे की वह गाय भी इस बीमारी का शिकार हो जाती है इस बीमारी से मनुष्य को कोई खतरा नहीं है इस बीमारी वे एक गाय से दूसरी गाय में संक्रमण की तरह फैलती है बीमारी में पशुओं का तापमान बढ़ता है इस कारण बुखार आ जाता है इसमें पशुओं के संपूर्ण शरीर में गाते अलग-अलग जगह हो जाती है यह गाते 5 सेंटीमीटर तक बताई गई है यह घाटे गाय के आंखों की पलकें गर्दन कान पूछ थन आदि में हो जाती है और इस कारण इनके पूरे शरीर में सूजन आ जाती है इस बीमारी में कई बार गाय के शरीर की घाटी कम हो जाती है और अपने आप जुड़ जाती है जिससे गाय स्वस्थ होने लगती है लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि की गाय के गाते कम होने की जगह बढ़ जाती है और गाय कमजोर होने लगती है जिस कारण उनकी मौत हो जाती है अगर मुंह में यह बीमारी हो तो मुंह में लार गिरती रहती है इससे कारण भूख कम हो जाती है अगर यह बीमारी नाक के फेफड़ों में मैं हो जाए तो निमोनिया खतरा बढ़ जाता है एसी संक्रमित गायों को आपको alag जगह रख दे जहां पर वह क्वारंटाइन हो जाए क्वारंटाइन शब्द का मतलब गाय बाहर ना निकल सके इस बीमारी का देसी इलाज यह है कि 25 ग्राम haldi 50 gram kali mirch 100 ग्राम गुड़ 100 ग्राम घी के मिश्रण करके लड्डू बनाकर गाय को खिलाएं जिससे कि गाय का यह रोग खत्म हो जाए हो सके तो चिकित्सक का उपयोग ले उन्हें बुलाए और इस बीमारी के बारे में बताएं सरकार को इस बीमारी के लिए निशुल्क सेवा करनी चाहिए इससे गाय माता की सेवा हो सके


