*"अक्षय तृतीया - दान दिवस पर्व मनाया"*
सकल दिगंबर जैन समाज द्वारा जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के कठिन तप, साधना और 1 वर्ष की दीर्घ तपस्या (उपवास) के उपरांत प्रथम पारणा (आहार) से जुड़े आत्म शोधन के महापर्व - अक्षय तृतीया को जैन संस्कृति व परंपरा अनुसार दान दिवस के रूप में तप, त्याग और संयम पूर्वक मनाया गया |
समाज के प्रवक्ता प्रवीण कुमार जैन ने बताया कि लॉक डाउन के चलते समाजजनों ने अपने घरों पर ही श्रद्धा पूर्वक पूजा-अर्चना कर भगवान आदिनाथ की आराधना की गई | वहीं धार्मिक जनों द्वारा एकासन, उपवास कर पर्व के प्रति अपनी आस्था प्रकट की |
इस मांगलिक अवसर पर जिनेंद्र भक्तों द्वारा णमोकार महामंत्र का जाप ,पाठ व भक्तामर विधान का अष्ट द्रव्यों से पूजन कर विश्व की सुख - समृद्धि व शांति की कामना की गई |
इसके साथ ही दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र चमत्कार जी में विराजित आचार्य ज्ञानसागर जी की शिष्या - अंतसमती माताजी ने संदेश देते हुए कहा कि वर्तमान वैश्विक कोरोना महा संकट के समय में संयम व तप की आत्म कल्याणकारी अक्षय परंपरा को जन-जन की जीवन शैली बनाने की महती आवश्यकता है |
इस मौके पर चमत्कारजी परिसर में विराजित सुपात्र अंतसमती व अक्षयमती माताजी को पड़गाहन कर नवधा भक्ति पूर्वक एवं सामाजिक दूरी का पालन करते हुए श्रावक- श्राविकाओं द्वारा उन्हें आहारचर्या कराकर पुण्य अर्जन किया |
सकल दिगंबर जैन समाज द्वारा जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के कठिन तप, साधना और 1 वर्ष की दीर्घ तपस्या (उपवास) के उपरांत प्रथम पारणा (आहार) से जुड़े आत्म शोधन के महापर्व - अक्षय तृतीया को जैन संस्कृति व परंपरा अनुसार दान दिवस के रूप में तप, त्याग और संयम पूर्वक मनाया गया |
समाज के प्रवक्ता प्रवीण कुमार जैन ने बताया कि लॉक डाउन के चलते समाजजनों ने अपने घरों पर ही श्रद्धा पूर्वक पूजा-अर्चना कर भगवान आदिनाथ की आराधना की गई | वहीं धार्मिक जनों द्वारा एकासन, उपवास कर पर्व के प्रति अपनी आस्था प्रकट की |
इस मांगलिक अवसर पर जिनेंद्र भक्तों द्वारा णमोकार महामंत्र का जाप ,पाठ व भक्तामर विधान का अष्ट द्रव्यों से पूजन कर विश्व की सुख - समृद्धि व शांति की कामना की गई |
इसके साथ ही दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र चमत्कार जी में विराजित आचार्य ज्ञानसागर जी की शिष्या - अंतसमती माताजी ने संदेश देते हुए कहा कि वर्तमान वैश्विक कोरोना महा संकट के समय में संयम व तप की आत्म कल्याणकारी अक्षय परंपरा को जन-जन की जीवन शैली बनाने की महती आवश्यकता है |
इस मौके पर चमत्कारजी परिसर में विराजित सुपात्र अंतसमती व अक्षयमती माताजी को पड़गाहन कर नवधा भक्ति पूर्वक एवं सामाजिक दूरी का पालन करते हुए श्रावक- श्राविकाओं द्वारा उन्हें आहारचर्या कराकर पुण्य अर्जन किया |




