*"पशु-पक्षियों को चारा ,फल, तरकारी, चुग्गा डाले"*
सकल दिगंबर जैन समाज के विभिन्न संगठनों द्वारा भगवान महावीर के जियो और जीने दो के संदेश से प्रेरित होकर कोरोना संकट के दौरान राजकीय एडवाइजरी की पालना करते हुए जीव दया से जुड़े परोपकारी कार्य किए जा रहे हैं |
समाज के प्रवक्ता प्रवीण कुमार जैन ने बताया कि परोपकार की मुहिम के तहत जीव दया का भाव रखते हुए दिगंबर जैन महिला महासमिति , विशुद्ध वर्धनी महिला मंडल द्वारा अहिंसा सर्किल आलनपुर स्थित चमत्कारजी मंदिर के सामने गायों को हरा चारा डाला गया, चमत्कार जी मंदिर कार्यालय स्टाफ द्वारा पक्षियों को चुगने के लिए चुग्गा डाला गया तथा श्रीमाल जैन जागृति संस्था की ओर से रणथंभोर रोड पर वानरों को फल, तरकारी खिलाकर मूक पशु-पक्षियों के हमदर्द बनने के लिए लोगों को प्रेरित किया |
इस पुनीत कार्य में दिगंबर जैन महिला महा समिति की अध्यक्ष मनीषा बाकलीवाल ,उपाध्यक्ष अनीता कासलीवाल ,युवा प्रकोष्ठ मंत्री ममता बाकलीवाल, इकाई प्रभारी बीना पाटनी ,मनोनीत सदस्य अनीता गोधा सहित सेवाभावी व्यक्तियों ने सहभागिता निभाई |
इसके साथ ही चमत्कारजी मंदिर परिसर में विराजित आचार्य ज्ञानसागर जी की शिष्या -आर्यिका अंतसमती माताजी ने संदेश देते हुए कहा कि दया धर्म का मूल है , प्राणी मात्र के प्रति दया करना सम्यक दृष्टि का गुण है | उन्होंने कहा कि जीवन की समग्रता के लिए भारतीय संस्कृति ,परंपरा , त्याग , मानव सेवा, जीव दया, आदि श्रेष्ठ मूल्यों को जीवन में उतारने की जरूरत है तब ही मनुष्य जीवन की सफलता पूर्ण मानी जाती है |
सकल दिगंबर जैन समाज के विभिन्न संगठनों द्वारा भगवान महावीर के जियो और जीने दो के संदेश से प्रेरित होकर कोरोना संकट के दौरान राजकीय एडवाइजरी की पालना करते हुए जीव दया से जुड़े परोपकारी कार्य किए जा रहे हैं |

इस पुनीत कार्य में दिगंबर जैन महिला महा समिति की अध्यक्ष मनीषा बाकलीवाल ,उपाध्यक्ष अनीता कासलीवाल ,युवा प्रकोष्ठ मंत्री ममता बाकलीवाल, इकाई प्रभारी बीना पाटनी ,मनोनीत सदस्य अनीता गोधा सहित सेवाभावी व्यक्तियों ने सहभागिता निभाई |
इसके साथ ही चमत्कारजी मंदिर परिसर में विराजित आचार्य ज्ञानसागर जी की शिष्या -आर्यिका अंतसमती माताजी ने संदेश देते हुए कहा कि दया धर्म का मूल है , प्राणी मात्र के प्रति दया करना सम्यक दृष्टि का गुण है | उन्होंने कहा कि जीवन की समग्रता के लिए भारतीय संस्कृति ,परंपरा , त्याग , मानव सेवा, जीव दया, आदि श्रेष्ठ मूल्यों को जीवन में उतारने की जरूरत है तब ही मनुष्य जीवन की सफलता पूर्ण मानी जाती है |


